150 साल बाद Vande Mataram पर संसद में क्या बोला PM मोदी? बयान से मचा सियासी तूफ़ान

लोकसभा में ‘Vande Mataram’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू हुई एक दिवसीय विशेष चर्चा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् भारत की स्वतंत्रता यात्रा में एक अटूट शक्ति की तरह खड़ा रहा। ब्रिटिश शासन की कठोरता और अत्याचारों के बीच भी इस गीत ने जनता को एकजुट किया, प्रेरित किया और स्वतंत्रता की लौ को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज है, जिसने हर दौर में देशवासियों को दृढ़ता और देशभक्ति की भावना से भर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान आपातकाल के काले दिनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वंदे मातरम् ने 100 साल पूरे किए थे, तब देश आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उस समय भारतीय संविधान को दबा दिया गया था और देशभक्ति की भावना रखने वाले अनेक लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे अंधकारमय दौर था, जिसने स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों को क्षति पहुँचाई। उस समय वंदे मातरम् की आत्मा को भी कुचलने का प्रयास किया गया, क्योंकि यह गीत लोगों में जागृति और विरोध का साहस पैदा करता था।

‘Vande Mataram’ की विरासत और राष्ट्र की एकता
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा भारत की राष्ट्रीय चेतना की यात्रा है। इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया, क्रांतिकारियों में ऊर्जा भरी और सामान्य नागरिकों के भीतर राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रबल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गीत हर उस भारतीय के हृदय में धड़कता है जो देश के प्रति समर्पण और निष्ठा रखता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज का भारत एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, और ऐसे में वंदे मातरम् के महत्व को फिर से समझना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।
‘अब समय है वंदे मातरम् की महानता को फिर स्थापित करने का’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब देश के पास यह स्वर्णिम अवसर है कि वह वंदे मातरम् की महानता और उसकी मूल भावना को दुनिया के सामने फिर स्थापित करे। उन्होंने कहा कि यह अवसर यूँ ही नहीं गुजरना चाहिए। आज जब भारत एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो राष्ट्रगीत के रूप में वंदे मातरम् के संदेश—त्याग, मातृभूमि के प्रति प्रेम और राष्ट्र की सेवा—को पुनः प्रकट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने इस चर्चा को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय कर्तव्य बताया और कहा कि इस गीत ने हमें हमेशा जोड़ा है, आगे भी जोड़ेगा।






