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Vladimir Putin: पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया की नजर, हथियार और तकनीक के साथ बड़े बदलाव की तैयारी!

Vladimir Putin: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर, गुरुवार को भारत पहुंचने वाले हैं। उनका यह दौरा पूरी दुनिया के लिए ध्यान का केंद्र बना हुआ है। इसका मुख्य कारण भारत और रूस के बीच आने वाला रक्षा समझौता है। इस समझौते के तहत सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि उनकी तकनीक भी भारत को मिलेगी। इसका मतलब है कि भारत अब इन हथियारों का निर्माण देश के भीतर भी कर सकेगा। इस दौर की पृष्ठभूमि में यह दौरा केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुतिन की आगमन समय और प्रधानमंत्री से मुलाकात

सूत्रों के अनुसार, पुतिन भारत में 4 दिसंबर, गुरुवार को शाम 7 बजे के करीब पहुंचेंगे। उनका पहला कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करना है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देश कई अहम मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं, जिनमें रक्षा उत्पादन, हथियारों की टेक्नोलॉजी और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।

Vladimir Putin: पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया की नजर, हथियार और तकनीक के साथ बड़े बदलाव की तैयारी!

राजघाट और द्विपक्षीय बैठक का कार्यक्रम

पुतिन का दूसरा दिन, यानी 5 दिसंबर, शुक्रवार, का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा। इस दिन पुतिन सबसे पहले राजघाट जा सकते हैं, जहां वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में भारत और रूस के बीच होने वाले समझौतों और सहयोग के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक के अंत में दोनों देशों के नेताओं द्वारा संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, जिसमें महत्वपूर्ण घोषणाएं और भविष्य की रणनीतियाँ शामिल होंगी।

FICCI कार्यक्रम और राज्य भोज

5 दिसंबर को पुतिन के कार्यक्रम में FICCI द्वारा भारत मंडपम, दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना भी शामिल है। इसके बाद वे राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्य भोज में भाग लेंगे। यह भोज दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों और सहयोग को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन का यह दौरा केवल राजनयिक बैठकें ही नहीं, बल्कि भारत और रूस के दीर्घकालिक संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम साबित होगा।

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