Sikar में जहरीला धुआं! आधी रात को दहशत, लोग मास्क पहन भागे अस्पताल—क्या है असली वजह?

Sikar के शांति नगर इलाके में बुधवार देर रात अचानक उठे जहरीले धुएँ ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। रात करीब 9:30 बजे शुरू हुआ यह धुआँ देखते ही देखते आधा दर्जन कॉलोनियों में फैल गया। हवा में मौजूद जहरीले तत्वों के चलते लोगों को सांस लेने में तकलीफ़, आँखों में जलन, सिरदर्द, और उल्टी जैसे लक्षण होने लगे। हालात बिगड़ते देख कई लोग तुरंत घरों से निकलकर मास्क पहन अस्पतालों की ओर भागे। एसके अस्पताल से लेकर जयपुर रोड के निजी अस्पतालों तक पूरी रात अफरातफरी का माहौल बना रहा। कुल 23 लोग अस्पतालों में भर्ती करवाए गए, जिनमें से 15 बच्चे थे। कई मरीजों को प्रारंभिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, लेकिन 65 वर्षीय एक महिला की हालत गंभीर होने पर उनकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय के लिए धुआँ इतना घना था कि गली-कूचों में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
संदेह: नए टेक्सटाइल प्लांट से गैस या केमिकल लीक
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुँची और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। शुरुआती स्तर पर गैस या किसी केमिकल के रिसाव की आशंका जताई जा रही है, जो पास में स्थापित नए टेक्सटाइल फैक्ट्री प्लांट से हो सकता है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री में कई दिनों से भारी रासायनिक गंध महसूस की जा रही थी। घटना के बाद लोगों में रोष भी देखने को मिला और उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन सक्रिय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विशेषज्ञ टीमें गठित
अपर जिला कलेक्टर रतन कुमार ने बताया कि जहरीले धुएँ के स्रोत की जांच के लिए विशेष जांच टीमें गठित कर दी गई हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों को आदेश दिए गए हैं कि वे फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाकों में विस्तृत निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि धुएँ का कारण तभी स्पष्ट होगा जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी। घटना के दौरान करीब 3:30 बजे तक पूरा क्षेत्र दहशत में डूबा रहा। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे और कई परिवार रातभर रिश्तेदारों के यहाँ या सुरक्षित स्थानों पर रुके रहे।
हालात काबू में, लेकिन लोगों में डर और गुस्सा बरकरार
सुबह होने तक स्थिति नियंत्रण में कर ली गई, लेकिन लोगों में डर और नाराज़गी दोनों कायम हैं। क्षेत्र के निवासी कह रहे हैं कि अगर यह रिसाव फैक्ट्री से हुआ है तो प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन दोनों जिम्मेदार हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका गंभीर असर पड़ा है, जिससे लोग काफ़ी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों ने मांग की है कि फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था की पुनः जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






