संजीव कुमार और सुलक्षणा पंडित की अधूरी प्रेम कहानी — मौत ने जोड़ा दोनों को एक ही तारीख पर

हिंदी सिनेमा की दुनिया में प्रेम कहानियां अक्सर परदे तक सीमित नहीं रहीं बल्कि कई बार हकीकत में भी उतनी ही मार्मिक रही हैं जितनी फिल्मों में दिखाई जाती हैं। ऐसी ही एक सच्ची लेकिन अधूरी प्रेम कहानी रही सुलक्षणा पंडित और संजीव कुमार की। यह कहानी उतनी ही संवेदनशील है जितनी दर्दभरी। संयोग देखिए कि सुलक्षणा पंडित का निधन उसी तारीख को हुआ जिस दिन संजीव कुमार दुनिया से रुखसत हुए थे यानी छह नवंबर को। दोनों जीते जी एक नहीं हो सके लेकिन इतिहास ने दोनों को एक ही दिन के माध्यम से हमेशा के लिए जोड़ दिया।
सुलक्षणा पंडित एक बहुमुखी कलाकार थीं जो अभिनय के साथ साथ गायन में भी निपुण थीं। वे एक प्रसिद्ध संगीत परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता नारायण प्रताप शास्त्रीय गायक थे और उनके चाचा पंडित जसराज संगीत की दुनिया का बड़ा नाम थे। सुलक्षणा ने बचपन से ही मंच पर गाना शुरू कर दिया था और बाद में फिल्मों में भी कदम रखा। वहीं संजीव कुमार थिएटर से फिल्मों तक पहुंचे और उन्होंने कोशिश और खिलौना जैसी फिल्मों से अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
सन् 1975 में फिल्म उलझन के सेट पर दोनों की मुलाकात हुई और सुलक्षणा को संजीव कुमार से प्यार हो गया। उन्होंने उनसे शादी का प्रस्ताव रखा लेकिन संजीव कुमार का दिल उस समय किसी और के लिए धड़कता था। वे हेमा मालिनी को बहुत चाहते थे लेकिन उनका प्यार एकतरफा साबित हुआ। हेमा मालिनी ने जब उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया तो संजीव कुमार टूट गए और उन्होंने खुद को अकेलेपन में डुबो लिया।
दूसरी ओर सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार से शादी की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। वे बार बार उन्हें मनाने की कोशिश करती रहीं लेकिन संजीव कुमार ने कभी हां नहीं की। जब 6 नवंबर 1985 को संजीव कुमार का निधन हुआ तो सुलक्षणा पूरी तरह टूट गईं। उन्होंने कभी शादी नहीं की और आजीवन कुंवारी रहीं। उन्होंने फिल्मों और गायन दोनों से दूरी बना ली।
सुलक्षणा एक प्रसिद्ध गायिका भी थीं। उन्होंने मोहम्मद रफी किशोर कुमार लता मंगेशकर और उदित नारायण जैसे दिग्गजों के साथ गीत गाए। फिल्म संकल्प के गीत तू ही सागर है तू ही किनारा है के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था। उनके अभिनय की झलक अपनापन अमर शक्ति और धरमकांटा जैसी फिल्मों में देखी गई। सन् 1988 में वे आखिरी बार फिल्म दो वक्त की रोटी में नजर आईं। उनकी और संजीव कुमार की प्रेम कहानी हमेशा अधूरी रही लेकिन दोनों की यादें भारतीय सिनेमा में अमर हो गईं।




