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Rajasthan News: ABRSM ने उठाया बड़ा सवाल! SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग, मृत BLO के परिवार को 1 करोड़ और नौकरी

Rajasthan News: कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक अशांति के बीच, एक शिक्षक संगठन ने भी सवाल उठाए हैं। ऑल इंडिया राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ (ABRSM), जो खुद को एक सांस्कृतिक राष्ट्रीयतावादी संगठन बताता है, ने SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि इतने कम समय में SIR पूरा करना व्यावहारिक नहीं है। साथ ही, संगठन ने मृत BLO (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) के परिवार के लिए ₹1 करोड़ मुआवजा और एक सरकारी नौकरी की भी मांग की है। महासंघ ने कहा कि वह SIR के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल समयसीमा बढ़ाने की आवश्यकता महसूस कर रहा है।

BLO शिक्षकों की समस्याएं और उनकी मांगें

संगठन ने चुनाव आयोग पर यह आरोप लगाया कि लोगों को SIR के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जिससे BLO और मतदाताओं दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समय और संसाधनों की कमी तथा अधिकारियों के रवैये को देखते हुए, संगठन ने इसे शिक्षकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। अपने पत्र में महासंघ ने छह प्रमुख मांगें रखीं: SIR की समयसीमा बढ़ाना, मृत या आत्महत्या करने वाले BLO के परिवार को मुआवजा और नौकरी देना, तकनीकी सहायकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति, अधिकारियों के उत्पीड़न से रोकना, BLO को उचित अतिरिक्त मानदेय देना और कठिन क्षेत्रों में अतिरिक्त BLO तैनात करना।

तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं

24 नवंबर को चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में महासंघ ने BLO शिक्षकों द्वारा सामना की जा रही तकनीकी और प्रशासनिक कठिनाइयों को उजागर किया। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी उपकरणों और नेटवर्क की कमी के कारण उनका काम कठिन और तनावपूर्ण हो गया है। BLO ऐप और पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहे हैं और दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क अनुपलब्ध है। इसके कारण शिक्षक अपनी निजी संसाधनों से काम करने के लिए मजबूर हैं। ऑनलाइन सत्यापन में भी समस्याएं आ रही हैं।

अधिकारियों के दबाव और उत्पीड़न के आरोप

पत्र में यह भी कहा गया कि अधिकारी BLO शिक्षकों के साथ असम्मानजनक व्यवहार कर रहे हैं, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है और चुनाव की गरिमा के अनुकूल नहीं है। अधिकारियों द्वारा समय पर कार्य पूरा करने के लिए लगाए गए दबाव को पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक बताया गया है। महासंघ की महासचिव प्रोफेसर गीता भट्ट ने कहा, “हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस पत्र पर संज्ञान लेगा, उठाए गए मुद्दों को हल करेगा और SIR की समयसीमा बढ़ाएगा।” इस विवाद ने राजनीतिक परिस्थितियों को और तनावपूर्ण बना दिया है और अब इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

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