Rajasthan: कोटा में शिव मंदिर में तोड़फोड़ से हिंदू संगठनों में आक्रोश, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

Rajasthan के कोटा शहर में स्थित एक शिव मंदिर में घुसकर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने की घटना से हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। रविवार सुबह हुई इस घटना के बाद बजरंग दल सहित कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर हनुमान चालीसा का पाठ किया और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। सुबह मंदिर परिसर में शिव परिवार की टूटी हुई मूर्तियाँ मिलने से पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और मंदिर परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे।
खरीदारी केंद्र रोड पर बाजार बंद कराने की चेतावनी, पुलिस ने रोका
विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने गुंमनपुरा थाना क्षेत्र स्थित शॉपिंग सेंटर रोड पर बाजार बंद कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मौके पर पहुंचे कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने स्थिति का जायज़ा लिया और लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। पुलिस ने आश्वासन दिया कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और किसी भी हाल में उसे बख्शा नहीं जाएगा।

मूर्ति और वस्त्र जलाए गए, सुबह पुजारी ने देख दंग रह गया
यह घटना कोटा के शॉपिंग सेंटर क्षेत्र स्थित पीपलेश्वर महादेव मंदिर में हुई। रविवार सुबह जब मंदिर के पुजारी लगभग छह बजे मंदिर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि शिव परिवार की मूर्तियाँ टूटी हुई पड़ी हैं और देवी-देवताओं के वस्त्र जले हुए हैं। यह दृश्य देखकर पुजारी घबरा गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और हिंदू संगठनों ने घोषणा की कि यदि आरोपी जल्द गिरफ्तार नहीं हुआ तो शॉपिंग सेंटर रोड का बाजार बंद कराया जाएगा।
CCTV फुटेज आया सामने, 48 घंटे में गिरफ्तारी की मांग
घटना के दौरान का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें एक युवक मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए दिखाई दे रहा है, जिसे इस तोड़फोड़ का आरोपी माना जा रहा है। पुलिस इसी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद हिंदू संगठनों ने अपना धरना समाप्त कर दिया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि आरोपी को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाएँ बेहद संवेदनशील होती हैं और ऐसी हरकतें समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं।






