राजस्थान

Kota Church Controversy: कोटा में बड़ा धमाका! पास्टर का ‘शैतान की सरकार’ बयान—पहली FIR ने मचा दी हलचल

Kota Church Controversy: राजस्थान के कोटा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में खलबली मचा दी है। शहर के बोरखेड़ा इलाके में स्थित बीरशेबा चर्च में आयोजित एक प्रार्थना सभा के दौरान ईसाई मिशनरियों ने राज्य सरकार पर विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही हिंदू संगठनों ने तीखा विरोध जताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामला गंभीर होने पर पुलिस ने राजस्थान के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली FIR दर्ज कर ली है। यह कानून हाल ही में 29 अक्टूबर से लागू हुआ है और इस घटना ने इसकी संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद: प्रार्थना सभा में दिया गया विवादित बयान

जानकारी के अनुसार, 4 से 6 नवंबर तक बीरशेबा चर्च में एक तीन-दिवसीय प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी, जिसे “सत्संग” के नाम पर प्रचारित किया गया था। इस सभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिनमें कई हिंदू समुदाय के लोग भी शामिल थे। सभा के दौरान मंच से कुछ लोगों ने अपने पुराने हिंदू जीवन और ईसाई धर्म अपनाने के बाद आए बदलावों के बारे में बताया। इसी बीच दिल्ली से आए पादरी चांडी वर्गीस ने एक ऐसा विवादित बयान दिया जिसने माहौल को गर्मा दिया। वायरल वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं—“राजस्थान पर शैतान का राज है, अब यह राज खत्म होगा। यहां ईसाई धर्म का शासन होगा और प्रभु यीशु की कृपा पूरे प्रदेश पर बरसेगी।” यही बयान इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया।

हिंदू संगठनों का विरोध और नई कानून के तहत पहली FIR

वीडियो सामने आते ही विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों ने प्रार्थना सभा को धर्मांतरण बढ़ाने की कोशिश बताते हुए तीखा विरोध शुरू कर दिया। संगठनों का आरोप है कि सभा में हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कही गईं और लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। बढ़ते दबाव के बीच कोटा पुलिस ने शिकायत मिलने पर तुरंत एक्शन लिया और दो ईसाई मिशनरियों के खिलाफ राजस्थान धर्मांतरण निषेध अधिनियम 2024 की धारा 3 और 5, तथा UAPA की धारा 10 और 11 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि वीडियो की बारीकी से जांच की जा रही है और आयोजकों से पूछताछ की जाएगी। आगे की कार्रवाई जांच के बाद तय होगी। यह नया कानून लागू होने के बाद दर्ज की गई पहली FIR है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

राजनीतिक हलचल और बढ़ती संवेदनशीलता

राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। सरकार का कहना है कि किसी भी तरह के जबरन या प्रेरित धर्मांतरण के प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोटा से विधायक और कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने भी कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि नया कानून लागू होने के बाद भी ऐसी “हिम्मत” दिखाना अत्यंत गंभीर मामला है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय है। दूसरी ओर, चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल धार्मिक सभा थी और वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में दिखाया जा रहा है। लेकिन पादरी का विवादित बयान, नया कानून, और हिंदू संगठनों का विरोध—इन सबने मिलकर इस मामले को बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गरम बना दिया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीति और कानूनी कार्रवाई दोनों ही तेज होने की संभावना है।

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