ITBP Jawan Ajit Chaudhary: शहीद ITBP जवान अजीत चौधरी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही मातम पसरा

झुंझुनूं जिले के सुरजगढ़ क्षेत्र के स्वामी सेही गांव में शुक्रवार का दिन गहरे मातम में बदल गया, जब ITBP Jawan Ajit Chaudhary का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। अजीत कुछ ही घंटों बाद घर पहुंचने वाले थे, परिवार उनकी राह देख रहा था, लेकिन नवलगढ़ के पास सड़क हादसे में उनकी मौत की खबर ने पूरे गांव को शोक में डूबो दिया। परिवार को यह विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस बेटे, पति और पिता का इंतजार वे कर रहे थे, वही हमेशा के लिए बिछड़कर तिरंगे में लिपटा वापस आया।
मां और पत्नी बेहोश हुईं, रोते-रोते टूट पड़ा परिवार
जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में लाया गया, चारों ओर चीख-पुकार मच गई। मां सरिता देवी बार-बार बेहोश हो रही थीं और रोते हुए बार-बार पूछ रही थीं—“मेरे बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था… इतनी बड़ी मुसीबत क्यों आ गई?” पत्नी सुनीला कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल था। वह लगातार अपने पति को पुकार रहीं थीं। यह दृश्य इतना भावुक था कि मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई थी, और लोगों का हुजूम जवान की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ा।
सबसे हृदयविदारक क्षण तब आया जब जवान के 7 वर्षीय बेटे पल्लवित ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। एक मासूम बच्चे द्वारा पिता की चिता जलाने का दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया। ITBP के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी देकर अजीत को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। जब तिरंगा उनके बेटे और पिता राजेंद्र को सौंपा गया, तो माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा।

2011 में हुई थी भर्ती, परिवार देश सेवा से जुड़ा
अजीत चौधरी की भर्ती ITBP में साल 2011 में हुई थी। वह अरुणाचल प्रदेश के लेखावली में 61वीं बटालियन में बतौर कॉन्स्टेबल GD पद पर तैनात थे। इस बार वह 52 दिन की छुट्टी लेकर घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ही नवलगढ़ के पास सड़क दुर्घटना ने उनकी जिंदगी छीन ली। अजीत का परिवार हमेशा से सेवा के कार्यों से जुड़ा रहा है। छोटे भाई मनीष भारतीय सेना में सेवारत हैं, जबकि पत्नी सुनीला कुमारी और भाभी सोमाना दोनों सरकारी स्कूलों में शिक्षक हैं। पिता राजेंद्र खेती-बाड़ी संभालते हैं और मां सरिता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।
पूरे गांव ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
गांव के सरपंच ईश्वर सिंह पूनिया ने बताया कि अजीत के दादा हीरानंद सैपवार शिक्षक रहे थे और उनका परिवार गांव में अत्यधिक सम्मानित माना जाता है। अजीत की मौत की खबर मिलते ही सुबह से गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन था। हर घर में शोक की लहर दौड़ गई थी। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे और उन्होंने अपने शूरवीर बेटे को अंतिम विदाई दी।
जवान के अंतिम यात्रा मार्ग पर कदम-कदम पर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। पूरे गांव में केवल एक ही आवाज गूंज रही थी—“अमर रहे, अजीत भैया अमर रहे।” अजीत चौधरी की शहादत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया, लेकिन साथ ही उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की मिसाल लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अंकित कर दी।






