राजस्थान

Air Pollution: राजस्थान में ठंड के साथ हवा जहरीली, सांस लेने में मुश्किल! स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

Air Pollution: जयपुर से रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में शीतकाल के आगमन के साथ ही मौसम में गिरावट के साथ हवा की गुणवत्ता भी तेजी से खराब हो गई है। जैसे-जैसे तापमान गिरता है, प्रदूषण के कण नीचे जमने लगते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और अधिक खराब होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वायु की स्थिति कई जिलों में “गंभीर” श्रेणी में पहुंच गई है। यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक मानी जा रही है।

भिवाड़ी में सबसे जहरीली हवा

राज्य में प्रदूषण मानकों की बात करें तो सबसे चिंता की स्थिति भिवाड़ी में देखी गई। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 319 दर्ज किया गया, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहने से अस्थमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन और फेफड़ों की समस्याएं गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भिवाड़ी पिछले कई दिनों से रेड ज़ोन में बना हुआ है, और वहां रहने वाले लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है।

Air Pollution: राजस्थान में ठंड के साथ हवा जहरीली, सांस लेने में मुश्किल! स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

अन्य जिलों में भी खराब वायु गुणवत्ता

भिवाड़ी के अलावा राज्य के कई अन्य जिले भी वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। डूंगरपुर में AQI 228 रिकॉर्ड किया गया, जो “खराब” श्रेणी में आता है। वहीं, जालोर, पाली और श्रीगंगानगर में AQI 203 दर्ज हुआ, जिससे हवा की गुणवत्ता और बिगड़ती नजर आ रही है। टोंक का AQI 251 पहुंच गया है, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों ने इन जिलों में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी है, खासकर उन लोगों के लिए जो सांस की बीमारियों से ग्रस्त हैं।

सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि शीतकाल में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर कम से कम भेजें, घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, और बाहर निकलते समय मास्क पहनना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन से इस पर नियंत्रण के उपाय करने की भी उम्मीद की जा रही है। वर्तमान स्थिति में जागरूकता और सावधानी ही सुरक्षित रहने का सबसे बड़ा उपाय है।

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